ऋतु वर्षा की आयी है

मानसून की कुछ बौछारें आई हैं
संग अपने, मिट्टी का श्रृंगार लायी हैं
बीजों ने अंकुरित हो, देखा नवजीवन
अब आकाश की ओर बढ़ने की तैयारी है
जीवन के सूखेपन को तर करने
देखो, ये ऋतु वर्षा की आयी है

कलियों ने अभी अभी है खिलना सीखा
कलम नवीनों ने भी अब बढ़ना सीखा
बंजर धरती ने देखो हरी चादर ओढ़ी
नभ ने भी देखो अपनी पिचकारी छोड़ी
निर्जीवों में जीवन का सींचन करने
देखो, ये ऋतु बरसाती आयी है


सौंधी सौंधी खुशबू ने बारिश की आहट दी
खलिहानों की गीली मिट्टी ने खेतीहरों को राहत दी
चल पड़े हैं बढ़ाने धरती का सम्मान
चंद दिनों में लहलहा उठेंगे ये अपने खलिहान
हरीतिमा से आच्छादित करने धरती को
देखो, ये ऋतु वर्षा की आयी है


उन्मादी है ये मौसम बरसात का
प्रीत का, प्रेम के अनहद नाद का
बारिश की बूंदों के कलकल के सहारे
कन्हैया की बंशी राधा को पुकारे
प्रेम सुधा का रस बरसाने जीवन में
देखो, ये ऋतु वर्षा की आयी है


कुछ बौछारें आई हैं
संग कीट पतंगें लायी हैं
करने आल्हादित भूमि को हरियाली से
ये अंबर का प्रेम संदेसा लायी हैं
वसुधा के आंगन को कोमल करने
देखो, ये ऋतु वर्षा की आयी है


बंजरता न हो किसी उपवन में
ऋतु वर्षा का ध्येय यही है
हो समरसता का सींचन जग में
जीवन का उद्देश्य यही है
नवनिर्माण के रोप लगाने अंतर्मन में
देखो, ये रिमझिम बरसातें आयी हैं


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