गुरु वंदन
गुरु ने जलायी ज्ञान की ज्योति जीवन में
गुरु ने दिया जीवटता का मंत्र मन में
गुरुओं ने किया प्रकाशित इस मानव तन को
गुरु ने किया आलोकित अंतर्मन को
गुरु ने मूल्यों का पाठ पढ़ाया
गरुओं ने ही हमको राह दिखाया
गुरु से ही भविष्य है, भूत, वर्तमान है
गुरु से ही राष्ट्र का कीर्तिमान है
गुरुओं के ज्ञान से ही महा-पुरूष हुए
गुरुओं से ही शिष्य सभी मशहूर हुए
गुरु के सानिध्य में जीवन दैदीप्यमान है
गुरु इस जग में सबसे महान है
गुरु के ज्ञान से ही मनुष्य की वृद्धि है
उनके संस्कार से ही समाज की समृद्धि है
गुरु के दिए ज्ञान से ही वाणिज्य में रिद्धि है
गुरु-शिष्य संस्कृति से ही शास्त्रों की सिद्धि है
ज्ञान के झंकार से झंकृत है कण कण
अज्ञानता से तिमिर है, जीवन का हरेक क्षण
गुरुओं ने ज्ञान की लौ से प्रकाशित किया यह जीवन
डूबते बालक को उठा, दिया नवजीवन
आज खड़ा निर्भीक हूं, गुरुओं की दीक्षा है
हर पग पर अडिग रहने की गुरुओं ने दी शिक्षा है
गुरुओं के ज्ञान से मुझे आत्मसम्मान मिला है
उन्हीं के आशिर्वाद से जग में स्थान मिला है
जीवन को जीवंत बनाने वाले गुरुजन अतिपूज्य हैं
नैतिकता का पाठ सिखाने वाले गुरुजन देवतुल्य हैं
ऐसे गुरुओं का मैं सहृदय वंदन करता हूं
आत्मा की गहराइयों से अभिनंदन करता हूं
यह जीवन सार्थक है गरुओं के ही ज्ञान से
यह जीवन साकार है उनके दिए संस्कार से
जिनके ऋण का ऋणी ये समूचा संसार है
ऐसे मानव - शिल्पकारों को दंडवत् प्रणाम है
वंदना स्वरुप समर्पित ये कुछ शब्द-सुमन-व्यवहार हैं
मेरे जीवन के रचयिताओं को को मेरा वारंवार प्रणाम है
-सूर्यकांत साहू
(गुरु पूर्णिमा, मंगलवार, १६ जुलाई २०१९)


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