स्वच्छता का इंकलाब

जिस धरती ने हमको आश्रय स्नेह भरपूर दिया
उसको बदले में हमने गंदगी का नासूर दिया
जिसकी मिट्टी ने हमें अन्न, और पीने को नीर दिया
प्रदूषण फैलाकर हमने ही धरती मां का सीना चीर दिया
बंजारता की पीड़ा दी अब हम मरहम लगाएंगे
एकजुट होकर इस धरा को प्रदूषण मुक्त बनाएंगे

आओ हाथ बढ़ाएं हम, कदम मिलाकर संग चलें
स्वच्छ भारत की राह पर, इंकलाब का उमंग चले
पूर्व से पश्चिम और कश्मीर से दक्षिणतम छोर तक स्वच्छ भारत अभियान चले
उठा के झाड़ू हाथ में पूरा हिंदुस्तान चले


नदियों की जलधाराओं को हमने ये कैसा सम्मान दिया
अपनी नादानियों से, अमृत में हलाहल घोल दिया
गंगा मां के आंचल में हमने पापों को धोया है
और गंदी नालियों को हमने इसमें छोड़ा है
रूढ़िवादिता छोड़ो अब, अवशेष बहाना छोड़ दो
नीर को निर्मल रहने दो, नालों का मुंह मोड़ दो

नदियों को स्वच्छ बनाएं हम, हो पवित्र इसका जल
दे सकें हम अपने भारत को ताकि एक सुरक्षित कल
हर दिल में अगर हिन्द है तो गोमुख से गंगा के प्रवाह तक स्वच्छ भारत अभियान चले
उठा के झाड़ू हाथ में पूरा हिंदुस्तान चले


अपनी मां बहनों की अस्मिता की रक्षा कैसे कर पाएंगे
जब  हम चारदीवारी के भीतर व्यवस्था न कर पाएंगे
आज भी अदद शौचालय के लिए तरसता देश का मजदूर है
उसका परिवार आज भी खुले में शौच करने को मजबूर है
झुग्गियों वाली बस्तियों में आधी आबादी का घर है
मेरे देश में आज भी महामारी का डर है

"दरवाजा बंद तो बीमारी बंद" यही नारा अपनाएंगे
खुले में शौच से मुक्ति पाकर बीमारियों से छुटकारा पाएंगे
हर गली, घर - आंगन से, देश के हर नगर तक स्वच्छ भारत अभियान चले
उठा के झाड़ू हाथ में पूरा हिंदुस्तान चले


ढेरों गंदगी मचा रखी है, हम कैसे शुचिता लाएंगे
इतना जहर तो घोल दिया, अब कैसे ये गुलशन महकाएंगे
अगर दिवाली पर इस बार भी पटाखों का विस्फोट करना है
तो फिर क्यों बेवजह स्वच्छता के नारों का उद्घोष करना है
दो हजार उन्नीस तक बापू के सपनों का भारत बनाने की तैयारी है
मोदी जी ने भी कमर कस ली, अब बारी हमारी है

दिखला दें अब दुनिया को की भारत आशावादी है
हर दिल में अगर तिरंगा और धड़कन में 'भारत मां प्यारी' है
हिन्द सागर की गहराइयों से हिमालय के शिखर तक स्वच्छ भारत अभियान चले
उठा के झाड़ू हाथ में पूरा हिंदुस्तान चले

Comments

Popular posts from this blog

स्वप्न यात्रा

जरूरी है

पच्चीस बछर के छत्तीसगढ़